BSEB 12th Geography Question Answer 2024 | Class 12th Geography Solutions In Hindi 2024

BSEB 12th Geography Question Answer :- दोस्तों यदि आप Class 12 Geography question answer in hindi की तैयारी कर रहे हैं तो यहां पर आपको Geography Class 12 Question Answer in Hindi दिया गया है जो आपके Class 12th Geography Solutions In Hindi के लिए काफी महत्वपूर्ण है | Geography chapter wise subjective 12th


BSEB 12th Geography Question Answer 2024

1. सेवा सेक्टर (तृतीयक व्यवसाय) क्या है? (What is meant by service sector (tertiary occupation ) ? 

उत्तर ⇒ तृतीयक व्यवसाय वह क्रियाकलाप है जो किसी मूर्तवस्तु का उत्पादन न कर केवल सेवा प्रदान करता है। इसमें मिस्त्री, प्लंबर, रसोइया, वकील, शिक्षक आदि के व्यवसाय सम्मिलित
है। व्यापार, परिवहन, संचार और सेवाएँ कुछ अन्य तृतीयक कार्यकलाप हैं। वास्तव में, तृतीयक व्यवसाय सेवाएँ हैं, जिनके प्रमुख वर्ग निम्नलिखित हैं

(i) वाणिज्यिक सेवाएँ – विज्ञापन, कानूनी सेवाएँ, जन-संपर्क और परामर्श,

(ii) वित्त, बीमा, भूमि और भवन जैसी अचल संपत्ति का क्रय-विक्रय,

(iii) उत्पादक और उपभोक्ता को जोड़ने वाले थोक और फुटकर व्यापार, रख-रखाव,

(iv) परिवहन और संचार- रेल, सड़क, जहाज, वायुयान, डाक-तार सेवाएँ,

(v) मनोरंजन — रेडियो, दूरदर्शन, फिल्म और साहित्य,

(vi) विभिन्न स्तरीय प्रशासन अधिकारी, पुलिस, सेना तथा अन्य जन सेवाएँ और,

(vii) लाभ रहित सामाजिक कार्यकलाप शिशु चिकित्सा, पर्यावरण, ग्रामीण विकास आदि से जुड़े संगठन ।


2. उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? इन्होंने भारत के औद्योगिक विकास में किस प्रकार से सहायता की है? 

उत्तर ⇒1991 में भारत में अभूतपूर्व आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया था, विदेशी मुद्रा का भंडार समाप्त हो रहा था, नये ऋण नहीं मिल रहे थे और विदेशी निवेश वापस होने लगे थे। इन समस्याओं के समाधान के लिए जुलाई, 1991 में नई आर्थिक नीति लागू की गई, जिसके अन्तर्गत नई औद्योगिक नीति भी लागू हुई। इस नीति के तीन मुख्य लक्ष्य हैं— उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (भू-मंडलीकरण) ।

(i) उदारीकरण (Liberalisation)—उदारीकरण आर्थिक विकास की एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा उद्योगों और व्यापार को लालफीताशाही के अनावश्यक प्रतिबंध से मुक्त किया जाता है। इसके अन्तर्गत 6 उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी उद्योगों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र में घाटे में चलने वाले कुछ उद्योगों को निजी क्षेत्र में दे दिया गया है तथा कुछ उद्योगों के शेयर वित्तीय संस्थाओं, सामान्य जनता और कामगारों को दिये गये, विदेशी पूंजी निवेश पर से प्रतिबंध हटाया गया, विदेशी तकनीक के प्रवेश का उदारीकरण हुआ और औद्योगिक स्थानीयकरण में भी उदारता प्रदान की गई। इससे उद्योगों को बड़ा लाभ हुआ।

(ii) निजीकरण (Privatisation ) — निजीकरण का अर्थ है देश के अधिकतर उद्योगों के स्वामित्व, नियंत्रण तथा प्रबंध का निजी क्षेत्र में किया जाना। इस औद्योगिक नीति में सार्वजनिक क्षेत्र में उद्योगों की प्राथमिकता को खत्म कर दिया गया और निजी क्षेत्र को महत्त्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई। सार्वजनिक क्षेत्र में मजबूरन कुछ अलाभकारी उद्योगों को लेना पड़ा।

(iii) वैश्वीकरण (Globalisation)—वैश्वीकरण का अर्थ मुक्त व्यापार तथा पूँजी और श्रम की मुक्त गतिशीलता द्वारा देश की अर्थव्यवस्था को संसार की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना है। दूसरे शब्दों में, विदेशी पूँजी निवेश तथा विदेशी व्यापार को (आयात निर्यात के प्रति बंधों को यथासंभव समाप्त करके) प्रोत्साहित करना है। भारत में इस नीति के अंतर्गत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए अर्थव्यवस्था को खोला गया, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को खत्म किया गया तथा भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के सहयोग से उद्योग खोलने की अनुमति प्रदान की गई। इससे उद्योगों का तो विकास हुआ, किन्तु विकसित और विकासशील राज्यों के बीच अंतर बहुत बढ़ गया है। उदाहरणस्वरूप 1991-2000 में कुल औद्योगिक निवेश का 23% औद्योगिक रूप से विकसित महाराष्ट्र के लिए, 17% गुजरात के लिए, 7% आंध्रप्रदेश के लिए और 6% तमिलनाडु के लिए था, जबकि सबसे अधिक जनसंख्या वाले उत्तरप्रदेश के लिए केवल 8% और सात उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए केवल 1% था। वास्तव में, आर्थिक रूप से कमजोर राज्य खुले बाजार में औद्योगिक निवेश को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं।


3. चतुर्थक क्रिया-कलापों का विवरण दें। (Describe quarternary activities.)

उत्तर ⇒ चतुर्थक क्रियाकलाप ज्ञान से संबंधित क्रियाकलापों जैसे शिक्षा, सूचना, शोध और विकास की सेवा का एक विशिष्ट वर्ग है। चतुर्थक क्रिया कलाप से तात्पर्य उन उच्च बौद्धिक व्यवसायों से है, जिनका दायित्व चिंतन तथा शोध और विकास के लिए नये विचार देना है। इस वर्ग की विशिष्टता लोगों का उच्च वेतनमान और पदोन्नति के लिए उनका बहुत अधिक गतिशील होना है। चतुर्थक क्रियाकलापों में से कुछ निम्नलिखित है: सूचना का संग्रहण, उत्पादन और प्रकीर्णन अथवा सूचना का उत्पादन भी । चतुर्थक क्रिया-कलाप अनुसंधान और विकास पर केंद्रित होते हैं और विशिष्टीकृत ज्ञान, प्रौद्योगिकी कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से संबद्ध सेवाओं के उन्नत नमूने के रूप में देखे जाते हैं। चतुर्थक क्रियाकलाप वास्तव में सेवाओं का विकसित और उन्नत रूप है। चतुर्थक क्रियाकलापों को बाह्य स्रोतन के माध्यम से भी किया जा सकता है।


4. किसी देश के आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर किस प्रकार सहायक है ? (How is service sector helpful in economic development of a country?)

उत्तर ⇒आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर बहुत सार्थक है और इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है। सेवाओं के बढ़ते हुए महत्त्व ने इसे उत्पादक अर्थव्यवस्था में एक विशिष्ट स्थान दिला दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 75% और यू० के० में 80% कर्मी सेवा क्षेत्र में हैं, जब 1950 में यू० के० में केवल 51% और संयुक्त राज्य में लगभग 40% कर्मी इस सेक्टर में कार्यरत थे । अल्प विकसित देशों में 10% से भी कम लोग इस सेक्टर में हैं। वास्तव में, विकासशील देशों में भी सेवा क्षेत्र का विस्तार द्वितीयक क्षेत्र की तुलना में तेजी से हो रहा है, लेकिन असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मी की अधिकता के कारण इसका लेखा-जोखा करना कठिन कार्य है। संसार भर में सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की वृद्धि के अनेक कारण हैं।

Geography chapter wise subjective 12th Class Question Answer 2024


5. भारत में जलप्रदूषण के कारणों और परिणामों का वर्णन करें।(Describe the causes and consequences of water pollution in India.) अथवा, भारत की गंगा और यमुना दो सर्वाधिक प्रदूषित नदियाँ हैं। कैसे? इस कथन का परीक्षण करें। Or, (Ganga and Yamuna are the two highly polluted rivers of India. How ? Examine this statement.)

उत्तर ⇒प्राकृतिक या मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप जल की गुणवत्ता में हुए निम्नीकरण को जल प्रदूषण कहा जाता है, जो आहार, मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य, कृषि, मछली पालन या मनोरंजन के लिए अनुपयुक्त या खतरनाक होते हैं। भारत में जनसंख्या की वृद्धि तथा औद्योगिक विस्तार के कारण जल के अविवेकपूर्ण उपयोग से नदियों, नहरों, झीलों तथा तालाबों में जल की गुणवत्ता में बहुत अधिक निम्नीकरण हुआ है। इनमें निलंबित कण, कार्बनिक तथा अकार्बनिक पदार्थ अधिक मात्रा में समाहित हो गये हैं, जल में स्वतः शुद्धिकरण की क्षमता नहीं रह गयी है। और यह उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। जल प्रदूषण प्राकृतिक (अपरदन, भूस्खलन, पेड़-पौधे और मृत पशु के सड़ने- गलने) और मानवीय (कृषि, उद्योग और सांस्कृतिक गतिविधि) स्रोतों से होता है। इनमें उद्योग सबसे बड़ा प्रदूषक है। उद्योगों के अवांछनीय उत्पाद जैसे औद्योगिक कचरा, प्रदूषित अपशिष्ट जल, जहरीली गैसें, रासायनिक अवशेष इत्यादि बहते जल या झीलों में बहा दिये जाते हैं, जिससे जल प्रदूषित हो जाता है। चमड़ा उद्योग, कागज और लुग्दी उद्योग, वस्त्र तथा रसायन उद्योग सर्वाधिक जल प्रदूषक हैं। कानपुर और मोकामा का चमड़ा उद्योग गंगा को और दिल्ली का विविध औद्योगिक कचरा यमुना को प्रदूषित कर रहा है। इसी प्रकार कृषि में अकार्बनिक उर्वरक, कीटनाशक इत्यादि के उपयोग से भी जल प्रदूषण होता है। ये प्रदूषक जल के साथ भू-जल तक पहुँच जाते हैं और धरातलीय जल के साथ-साथ भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर देते हैं। घरेलू कचरा और अपशिष्ट  नदी में लाशों के विसर्जन से भी जल प्रदूषण होता है। कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, कोलकाता के घरेलू कचरे गंगा और हुगली को तथा दिल्ली का घरेलू कचरा यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं। दिल्ली के निकट यमुना में 17 खुले नाले मल जल डालते हैं। इसके अतिरिक्त तीर्थ यात्राओं, धार्मिक मेलों, पर्यटन इत्यादि सांस्कृतिक गतिविधियों के कारण भी जल प्रदूषित होता है। कृमि,  प्रदूषण से विभिन्न प्रकार की जल-जनित बीमारियाँ, जैसे—दस्त, आँतों की हेपेटाइटिस इत्यादि होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग एक-चौथाई संचारी बीमारी जल जनित होती है।


6. भारत के आर्थिक विकास में सड़कों की भूमिका का वर्णन करें। (Discuss the role of roads in the economic development of India.)

उत्तर ⇒ भारत के आर्थिक विकास में सड़कों का बड़ा योगदान है। भारत का सड़क जाल विश्व के विशालतम सड़क जालों में से एक है। इसकी कुल लम्बाई 33.1 लाख किमी० है । प्रतिवर्ष लगभग 85% यात्री तथा 70% माल सड़कों द्वारा ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाये जाते हैं। छोटी दूरियों की यात्रा के लिए सड़क परिवहन अपेक्षाकृत अनुकूल होता है। भारत में गाँव बड़े और छोटे नगरों से सड़क द्वारा जुड़ गए हैं तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार आ गया है । सीमांत सड़कें सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाती हैं। सड़कें विभिन्न क्षेत्रों के बीच सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक संपर्कों को बढ़ाती है। प्राकृतिक आपदा के समय रेलवे की तुलना में सड़क मार्ग से पहुँचना सरल है। कारें और आरामदेह बसें पर्यटन को सुविधाजनक बनाती है। नष्ट होने वाली वस्तुओं जैसे- दूध, फल, सब्जियों इत्यादि का शीघ्र परिवहन सड़क द्वारा संभव है। बस, ट्रक तथा कार कहीं भी रुक कर सवारी और सामान उतार चढ़ा सकती है। इसने पहाड़ी, ऊबड़-खाबड़, मरुस्थली, दलदल इत्यादि सब तरह के धरातलों को जोड़ दिया है।


7. भारत में भू-संसाधनों की विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याएँ कौन-सी हैं? उनका निदान कैसे किया जाए? (What are the various environmental problems of land resources in India? What is the solution ?)

उत्तर ⇒ भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए भू-संसाधन की महत्ता अधिक है, किन्तु देश -संसाधन अनेक पर्यावरणीय समस्याओं से भरे हैं, जिनमें कृषि भूमि की गुणवत्ता का भू मुख्य हैं। के निम्नीकरण, प्राकृतिक आपदा, मिट्टी अपरदन, जल जमाव, लवणीकरण इत्यादि इन समस्याओं का समाधान करके कृषि का विकास किया जा सकता है।

(i) कृषियोग्य भूमि का निम्नीकरण (Degradation)— जनसंख्या की अधिकता के कारण भारतीय कृषि भूमि का लगातार उपयोग हो रहा है, जिससे इसकी गुणवत्ता का ह्रास हुआ है और उर्वरता कम हो गई है। इसका समाधान फसल बदलकर और कुछ समय के लिए खेत को परती छोड़कर किया जा सकता है।

(ii) प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity)— भारतीय कृषि क्षेत्र का एक तिहाई भाग ही सिंचित है। इतने बड़े देश में एक ओर कुछ क्षेत्र वर्षाऋतु में बाढ़ से प्रभावित रहते हैं, तो दूसरे क्षेत्र सूखा ग्रस्त | सूखा और बाढ़ भारतीय कृषि के जुड़वा संकट हैं। उचित जल प्रबंधन द्वारा नहरों और नलकूपों का निर्माण करके इस समस्या का समाधान हो सकता है।

(iii) मिट्टी अपरदन (Soil Erosion)—– भारत में बड़े पैमाने पर मैदानी भागों में सतही अपरदन और पर्वतीय और पठारी भागों में अवनालिका अपरदन से मिट्टी का ऊपरी उपजाऊ तत्त्व बहकर अन्यत्र चला जाता है और पथरीली अनुपजाऊ भूमि सतह पर आ जाती है। खेतों के किनारे मेढ़ बनाना और वृक्षारोपण तथा पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीनुमा खेती करके इसका समाधान हो सकता है।

(iv) जल जमाव (Water logging)- निकास (outlet) के अभाव में कृषि भूमि का एक बहुत बड़ा भाग जल जमाव, वाष्पीकरण, लवणता और मृदा क्षारता के कारण बंजर हो चुका जल निकास का प्रबंध करके इसका समाधान किया जा सकता है। है।
(i) पर्याप्त जल मिलना- भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों, हिमालय के पर्वतीय भाग तथा पश्चिमी घाट पर्वत में पर्याप्त वर्षा होती है और नदियों में सालों भर पानी भरा रहता है। हिमालय से निकलनेवाली नदियाँ बड़ी-बड़ी हैं, जिन्हें सहायक नदियों से भी जल मिलता है।

(ii) जल का निरंतर प्रवाहित होते रहना-जल के निरंतर प्रवाहित होने से पनबिजली का उत्पादन सालों भर होता है। भारत में हिमालय से निकलनेवाली नदियाँ सदा प्रवाही हैं, क्योंकि इन्हें गर्मी में बर्फ के पिघलने से जल मिलता है। यह सुविधा दक्षिण की पठारी नदियों में नहीं है, फिर भी वहाँ बाँध और विशाल जलाशय बनाकर उनमें वर्षाकालीन जल एकत्रित कर जलाभाव की पूर्ति की जा सकती है।

(iii) जल का तीव्र वेग से गिरना – भारत में जल-वेग के लिए आदर्श स्थिति मिलती है। देश के पर्वतीय और पठारी भागों में जल तीव्र गति से बहता है और अनेक जलप्रपात पाये जाते हैं। इससे जल-विद्युत का उत्पादन सरल हो जाता है। इसके अतिरिक्त बहुउद्देशीय योजनाओं के अंतर्गत कृत्रिम बाँध बनाकर भी जल को तीव्र गति से गिराया जाता है।

(iv) विद्युत की माँग का व्यापक क्षेत्र-भारत में जल-विद्युत् का बाजार काफी विस्तृत है। यह एक विकासशील देश है, जहाँ घरेलू उपयोग के अतिरिक्त कृषि – मशीन, औद्योगिक मशीन, रेलगाड़ी इत्यादि में जलविद्युत की माँग दिनों दिन बढ़ती जा रही है ।

(v) शक्ति के अन्य साधनों का अभाव — भारत में कोयला, पेट्रोलियम इत्यादि शक्ति के साधन सीमित क्षेत्रों में उपलब्ध हैं। उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी भारत में आर्थिक विकास के लिए जलविद्युत का विकास लाभप्रद होगा।

(vi) तकनीक एवं पूँजी – भारत में जलविद्युत के विकास के लिए उपर्युक्त तकनीक और पर्याप्त पूँजी भी उपलब्ध हैं।


8. भारत में गंदी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए। (Describe the problems of slums in India.)

उत्तर ⇒ साधारणतया नगरीय जीवन को सुख और सुविधा संपन्न तथा रोजगार के अवसर के उपयुक्त माना जाता है। इसके विपरीत गाँवों में सुविधाओं और रोजगार के अवसर की कमी रहती है। इस कारण अधिकाधिक संख्या में लोगों का गाँवों से नगरों की ओर प्रवास होता है । अत्यधिक और अनियंत्रित ग्रामीण-नगरीय प्रवास के कारण नगरीय सेवाओं और सुविधाओं पर अत्यधिक बोझ पड़ता है, जिसके कारण नगर के भीतरी भाग में भूमि की कीमत बढ़ जाती है। और गाँवों से आये हुए या कम आय वाले लोग जहाँ-तहाँ झुग्गी-झोपड़ियों और गंदी – बस्तियों का निर्माण करते हैं। ये गंदी या मलीन बस्तियाँ समस्याओं के महाजाल में फँसी रहती हैं। भारत के जनगणना विभाग के अनुसार भारत के 607 नगरों में झुग्गी-झोपड़ियाँ हैं, जिनमें 4 करोड़ लोग या कुल नगरीय जनसंख्या का 23.6% रहती है। यह देश की कुल जनसंख्या का 4% है। महाराष्ट्र की 6% और मुम्बई की 49% जनसंख्या झुग्गियों में रहती है, जहाँ धारावी एशिया की विशालतम गंदी बस्ती है। गंदी बस्तियों के अन्तर्गत झुग्गी और झोपड़पट्टी के अतिरिक्त नगर के पुराने घने आबाद क्षेत्र तथा अनियोजित नये बसे क्षेत्र आते हैं। भारत की गंदी बस्तियाँ न्यूनतम वांछित आवासीय होते हैं, जहाँ जीर्ण-शीर्ण मकान, स्वास्थ्य की निम्नतम सुविधाएँ, खुली हवा, पेयजल, प्रकाश तथा शौच सुविधाओं जैसी आधारभूत सुविधाओं का अभाव पाया जाता है। यह क्षेत्र बहुत ही भीड़-भाड़, पतली सकरी गलियों और खुले नालों वाला होता है। यहाँ के लोग कम वेतन वाले असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, अतः ये अल्प पोषित होते हैं और बीमारियों से ग्रस्त रहते हैं। ये अपने बच्चों के लिए उचित शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते। गरीबी के कारण ये नशीली दवाओं, शराब, अपराध, गुंडागर्दी, कुरीति आदि का शिकार हो जाते हैं।

Geography Class 12 Question Answer in Hindi 2024


9. भारत का मानचित्र बनाकर निम्नलिखित को प्रदर्शित करें (Draw a map of India and show the following)—

(क) चेन्नई (Chennai)

ख) कन्याकुमारी (Kanyakumari )

(ग) पटना (Patna)

(घ) सूरत (Surat )

(ङ) मुंबई (Mumbai) 

उत्तर ⇒

 


10. भारत का मानचित्र बनाइए और निम्नलिखित को प्रदर्शित कीजिए (Draw a map of India and show the following)—

(क) जयपुर (Jaipur)

(ख) हैदराबाद ( Hyderabad)

(ग) डिगबोई (Digboi)

(घ) मथुरा (Mathura)

(ङ) तापी नदी (Tapi river)

उत्तर ⇒


11. भारत का मानचित्र बनाकर निम्नलिखित को इंगित करें (Draw a map of India and indicate the following 🙂

(क) पटना (Patna)

(ग) कोंकण तट ( Konkan coast)

(ख) दिल्ली (Delhi)

(घ) अंडमान-निकोबार द्वीप (Andaman & Nicobar islands )

(ङ) बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal)

(च) मुंबई हाई ( Mumbai-High)

उत्तर ⇒


12. भारत का ऐसा मानचित्र जिसमें हर राज्य का नाम अंकित हो ।

उत्तर ⇒


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Class 12th Geography Long Question
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 UNIT – IIIGeography ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) Part – 3
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 UNIT – VGeography ( दीर्घ उत्तरीय प्रश्न ) Part – 5

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