12th Biology VVI Subjective Question Answer | Class 12th Board Exam Biology Question 2024

12th Biology VVI Subjective Question Answer :- दोस्तों यदि आप Class 12th Board Exam 2024 की तैयारी कर रहे हैं तो यहां पर आपको 12th Biology Chapter 9 Subjective Question दिया गया है जो आपके Biology Class 12th Question In Hindi 2024 के लिए काफी महत्वपूर्ण है | 12th biology question paper 2024

10th & 12th Question PDF

12th Biology VVI Subjective Question Answer

1.वायटेल इन्डेक्स क्या है? इसे ज्ञात करने का सूत्र लिखें।

उत्तर ⇒ जननदर एवं मृत्युदर के प्रतिशतता अनुपात को जैविक इंडेक्स या वायटेल इंडेक्स कहते है। इसे ज्ञात करने का सूत्र हैं

N M vi = – x 100

जहाँ                             N = जननदर एवं

M= मृत्युदर


2. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी तथा वायोरिएक्टर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर ⇒ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी – यह एक ऐसी कोशिका है जो अपने पूर्वज कोशिका के विभाजन से बनी है। तथा यह एक ऐसी जैविक थैरेपी भी है जिसमें एक ही प्रकार के कई एंटीबॉडी की प्रतियाँ तैयार की जाती है। वायोरिएक्टर या फर्मन्टर—कम आपतन संवर्धन से पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं किया जा सकता। इन उत्पादों को अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए बायोरिएक्टर का प्रयोग किया जा सकता है। जिसमें सम्वर्धन का अधिक आयतन (100-1000) लीटर संशोधित किया जा सकता है। इस बायोरिएक्टर का डिजाइन एक बड़े बर्तन के समान है जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों, जन्तुओं व मानव कोशिकाओं का उपयोग करते हुए कच्चे माल का जैव रूप से विशिष्ट उत्पादों, व्यष्टि, एन्जाइम, आदि में परिवर्तित किया जाता है। बायोरिएक्टर वांछित उत्पाद प्राप्त करने के लिए अनुकूलतम परिस्थितियाँ उपलब्ध कराता है। वृद्धि के लिए तापमान pH क्रियाधर, लवण, विटामिन, ऑक्सीजन आदि की उपयुक्त मात्रा अनुकूलतम होना आवश्यक है जो बायोरिएक्टर सर्वाधिक उपयोग में लाया जाता है वह विलोडन (स्टिरिंग) प्रकार का है।


3. ‘नस्ल’ शब्द से आप क्या समझते हैं ? पशु प्रजनन के क्या उद्देश्य हैं ?

उत्तर ⇒ पशुओं का वह समूह जो वंश तथा सामान्य लक्षणों जैसे सामान्य दिखावट आकृति, आकार, संरूपण आदि में समान हो, एक नस्ल के कहलाते हैं।

         पशु प्रजनन का उद्देश्य पशुओं के उत्पादन को बढ़ाना तथा उनके उत्पादों की वांछित गुणवत्ता में सुधार करना है। पशुओं में श्रेष्ठ मादा चाहे वह गाय अथवा भैंस हो, प्रति दुग्धीकरण पर अधिक दूध देती है। दूसरी ओर, साँड़ों में श्रेष्ठ अन्य नरों की तुलना में श्रेष्ठ किस्म की संतति उत्पन्न कर सकते हैं।


4. मौन (मधुमक्खी पालन से आप क्या समझते हैं ? हमारे जीवन में इसका क्या महत्व है ?

उत्तर ⇒ शहद के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों के छत्तों का रख-रखाव ही मधुमक्खी पालन अथवा मौन पालन है। शहद के उच्च पोषक मान तथा इसके औषधीय महत्व के कारण मधुमक्खी पालन का हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। यह प्राचीन काल से चला आ रहा एक कुटीर उद्योग है। शहद उच्च पोषक महत्व का एक आहार है तथा औषधियों की देशी प्रणाली में भी इसका प्रयोग किया जाता है। मधुमक्खियाँ मोम भी पैदा करती है जिसका कांतिवर्द्धक वस्तुओं की तैयारी तथा विभिन्न प्रकार के पालिश वाले उद्योगों में प्रयोग किया जाता है। शहद की बढ़ती हुई माँग ने मधुमक्खियों को बड़े पैमाने पर पालने के लिए बाध्य किया है। यह उद्योग एक आयजनक व्यवसाय बन चुका है।

            मधुमक्खियाँ हमारी बहुत सी फसलों जैसे—सूर्यमुखी, सरसों, सेब तथा नाशपाती के लिए परागणक हैं। पुष्पीकरण के समय यदि इनके छत्तों को खेतों के बीच रख दिया जाए तो इससे पौधों की परागण क्षमता बढ़ जाती है और इस प्रकार फसल तथा शहद दोनों के उत्पादन में सुधार हो जाता है।


5. खाद्य उत्पादन को बढ़ाने में मात्स्यकी की भूमिका की विवेचना करें

उत्तर ⇒ मात्स्यकी एक प्रकार का उद्योग है जिसका संबंध मछली अथवा अन्य जलीय जीवों को पकड़ना, उनका प्रसंस्करण तथा उन्हें बेचने से होता है। हमारी जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग आहार के रूप में मछली, मछली उत्पादों तथा अन्य जलीय जन्तुओं आदि पर आश्रित है। भारतीय अर्थव्यवस्था में मात्स्यकी का महत्वपूर्ण स्थान है। यह तटीय राज्यों में विशेषकर लाखों मछुआरों तथा किसानों को आय तथा रोजगार प्रदान करती है। बहुत से लोगों के लिए यही जीविका का एकमात्र साधन है। मात्स्यकी की बढ़ती हुई माँग को देखते हुए इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की तकनीके अपनाई जा रही है। मात्स्यकी उद्योग विकसित हुआ है तथा फला-फूला है, जिससे सामान्यतः देश को तथा विशेषतः किसानों को काफी आमदनी हुई। इसकी प्रगति को देखते हुए अब हम ‘हरित क्रांति’ की भाँति ‘नीली क्रांति’ की बात करने लगे हैं।


6. विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादप का कौन-सा भाग सबसे अधिक उपयुक्त है तथा क्यों ?

उत्तर ⇒ विषाणु मुक्त पादप तैयार करने के लिए पादप का तना (meristems apical and axillary) एपिकल तथा एक्सीलरी भाग हमेशा सबसे अधिक उपयुक्त है। पादप विषाणु जड़, भूमिगत तना, बल्ब, रहियोजम (root, tubers, bulb, rhizome, etc.) आदि द्वारा संचारित होते हैं। विषाणु मुक्त स्वस्थ पादप प्राप्त करने के लिए यदि ऊतक संवर्धन (tissue culture) तकनीक का प्रयोग किया जाए तो हमें एक स्वस्थ रोगाणु मुक्त पादप प्राप्त होगा। तकनीक आलू, गन्ना तथा स्ट्राबेरी आदि में सफलतापूर्वक प्रयोग की जा है।


7. हरित क्रांति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

उत्तर ⇒ खाद्य उत्पाद को बढ़ाने के लिए कृषि के क्षेत्र में जो प्रयास किए जाते हैं तथा उसके फलस्वरूप उत्पाद में जो वृद्धि होती है, उसे हरित क्रांति कहते हैं। भारत में इस क्रांति का प्रारंभ 1960 में हुआ। हरित क्रांति को लाने में निम्नलिखित कारकों का महत्वपूर्ण योगदान है

(i) सिंचाई के लिए उपयुक्त प्रबंध होना ।

(ii) वैज्ञानिक विधि तथा दृष्टिकोण को कृषि के क्षेत्र में उपयोग में लाना ।

(iii) अच्छे तथा उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरकों का उपयोग।

 (iv) फसलों को खराब तथा नुकसान होने से बचाना।


8. कैलस एवं निलंबन संवर्धन का एक चार्ट के रूप में चित्रण करें।

उत्तर ⇒


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9. पशुओं के कुछ सामान्य रोग तथा टीकाकरणों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

उत्तर ⇒ पशुओं के कुछ सामान्य रोग और टीकाकरण- कभी-कभी पालतु पशु भी रोग से पीड़ित हो जाते हैं। पशुओं के आम रोग निम्न है

विषाणु रोग – मवेशियों, बकरियों और भेड़ों में त्वकशोथ, मवेशियों में पाद-मुख रोग।

जीवाण्विक रोग – मवेशियों और कुक्कुट पक्षियों में तपेदिक, मुर्गों में विषूचिका, बछड़ों में घटसर्प, मुर्गे में प्रवाहिका, भेड़ में पाद विगलन। समुचित स्वच्छता, एक निश्चित आहार, उचित आवास और सही समय व आयु पर इन रोगों के खिलाफ पशुओं में टीकाकरण कर, इसमें से अधिकांश रोगों की रोकथाम की जा सकती है।


10.  जैव पेटेंट किन-किन के लिए दिए जाते हैं ?

उत्तर ⇒

(i) सूक्ष्मजीवों के विभेद

 (ii) कोशिका क्रम

(iii) पौधों एवं जंतुओं के आनुवंशिकतः रूपांतरित विभेद

(iv) DNA क्रमों

(v) DNA क्रमों द्वारा कोडित प्रोटीनों,

(vi) विविध बापाटेक्नोलॉजीय प्रक्रियाएँ,

(vii) उत्पादन प्रक्रियाएँ

(viii) उत्पादन एवं

(ix) उत्पादों के अनुप्रयोग।


11. हिरुडिन का व्यापारिक उत्पादन किस प्रकार किया जाता है ?

उत्तर ⇒ हिरुडिन प्रोटीन, रक्त में थक्का बनने से रोकने वाला तत्व होता है। हिरुडिन कोडित करने वाले जीन का रसायनतः संश्लेषण किया गया है। इस जीन को सरसो कुल के ब्रैसिका नैपस में स्थानांतरित किया गया। इस ब्रैसिका नैपस के बीज में हिरुडिन प्रोटीन संचित होता है। इस प्रोटीन को विलग एवं शोधित करके औषधि के रूप में उपयोग किया जा रहा है।


12. कवक मूल प्रतिपालनीय कृषि हेतु किस प्रकार उपयोगी है ?

उत्तर ⇒ कवकों एवं पौधों की जड़ों के साथ सहजीविता को कवक मूल कहा जाता है। ये कवक मूल, जड़ो की सतह पर या जड़ों के भीतर रहते है। ये कवक फॉस्फोरस के अघुलनशील यौगिकों को, घुलनशील यौगिको में बदल देते हैं। ये कवक पादप वृद्धिकारी पदार्थ उत्पादित करते हैं और पोषी पौधों की मृदा रोगजनकों से रक्षा करते हैं इस प्रकार कम खर्च में उर्वरक तथा पर्यावरण को दूषित होने से बचाते हैं।


13. प्रतिपालनीय कृषि में वायोटेक्नोलॉजी की भूमिका की विवेचना कीजिए

उत्तर ⇒ प्रतिपालनीय कृषि में बायोटेक्नोलॉजी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है

(i) जैव उर्वरक — सूक्ष्मजीव जैसे बैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया कवक तथा एजोला जैसे पादपों का उपयोग उर्वरक के रूप में करना कम खर्चीला तथा पर्यावरण के अनुकूल है

(ii) जैवनाशी — खर-पतवार, कीटों एवं रोगजनकों का नियंत्रण जैविक कारकों द्वारा करने पर रसायनों के उपयोग में कमी आएगी। इन जैविक कारकों में बैसिलस थुरिजिएसिस नामक मृदा बैक्टीरिया एक उदाहरण है जिसके बीजाणु कीटनाशी क्रिस्टल प्रोटीन उत्पादित करते हैं जो कुछ कीटों के डिंबों का हनन करते हैं।

(iii) एकल कोशिका प्रोटीन— यह मानव भोजन में एक महत्त्वपूर्ण प्रोटीन समृद्ध संपूरक होता है जो प्रोटीन की कमी की समस्या का हल करने में सहायक होता है।

(iv) आनुवंशिक इंजीनियरी विधि से- उत्पादित फसले रोग रोधी तथा उच्च उत्पादकता वाली होती है।


14. किसी पौधे में रोग का विकास किस पर निर्भर करता है ?

उत्तर ⇒ पौधे में रोग के विकास के लिए निम्न कारक उत्तरदायी है

(i) पोषी का जीन प्रारूप

(ii) रग जनक का जीन प्रारूप एवं

(iii) वातावरण


15. जंतु प्रजनन के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं ?

उत्तर ⇒ जंतु प्रजनन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित है:

 (i) वृद्धि दर में सुधार।

(ii) अधिक दूध, मांस, अंडे, ऊन आदि का उत्पादन

(iii) दूध, मांस, अंडों आदि की गुणवत्ता में सुधार।

(iv) विभिन्न रोगों के लिए रोधिता में सुधार

(v) उत्पादक जीवनकाल में वृद्धि।

(vi) अपेक्षाकृत उच्च या कम से कम संतोषजनक जनन दर आदि ।


16. किलनी ज्वर के लक्षण बताएँ।

उत्तर ⇒ (i) तीव्र बुखार 41.1 – 41.7°C

(ii) अनियमित दुखार

(iii) कब्ज के बाद दस्त

(iv) भूख बंद

(v) RBC के अन्दर परजीवी उपस्थित


17. अधिक खाद्य उत्पादन में जंतु प्रजनन की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर ⇒ जंतु प्रजनन द्वारा इसके वृद्धि दर, रोगरोधी क्षमता तथा जंतु की उत्पादकता में वृद्धि की गई है। इसके द्वारा न सिर्फ इनके उत्पादों यथा माँस, अंडे, दूध आदि में वृद्धि हुई है, बल्कि जंतुओं के इन उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार संभव हुआ है। इसके लिए अंतःप्रजनन, बाह्य संकरण, अंतरास्पीशीज संकरण आदि विधियों का प्रयोग किया गया।

Biology Class 12th Question In Hindi 2024


18. मानव कल्याण में पशु पालन की भूमिका की संक्षेप में व्याख्या कीजिए

उत्तर ⇒ पशुपालन, पशुप्रजनन तथा पशुधन वृद्धि एक कृषि पद्धति है। पशुपालन का संबंध पशुधन जैसे— भैस, गाय, सूअर, घोड़ा, भेड़, ऊँट, बकरी आदि के प्रजनन तथा उनकी देखभाल से है जो मानव के लिए लाभप्रद है। इसमें कुक्कुट तथा मत्स्य पालन भी शामिल हैं।

                         अति प्राचीन काल से मानव द्वारा जैसे—मधुमक्खी, रेशमकीट, झींगा, केकड़ा, मछलियाँ, पक्षी, सूअर, भेड़, ऊँट आदि का प्रयोग उनके उत्पादों जैसे—दूध, अंडे, मॉस, ऊन, रेशम, शहद आदि प्राप्त करने के लिए किया जाता रहा है। विश्व की बढ़ती जनसंख्या के साथ खाद्य उत्पादन की वृद्धि एक प्रमुख आवश्यकता है। पशुपालन खाद्य उत्पादन बढ़ाने के हमारे प्रयासों में मुख्य भूमिका निभाता है। शहद का उच्च पोषक मान तथा इसके औषधीय महत्व को ध्यान में रखते हुए मधुमक्खी पालन अथवा मोम पालन पद्धति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डेयरी उद्योग से दुग्ध तथा इसके उत्पाद प्राप्त होते है। कुक्कुट का प्रयोग भोजन के लिए अथवा उनके अंडों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। हमारी जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग आहार के रूप में मछली, मछली उत्पादों तथा अन्य जलीय जन्तुओं पर आश्रित है। हमारे देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या पशुपालन उद्योग से किसी न किसी रूप में जुड़ी हुई है। पशुपालन हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। अतः मानव कल्याण में पशुपालन की बहुत बड़ी भूमिका है।


19. अधिक खाद्य उत्पादन मे वायोटेक्नोलॉजी की भूमिका की विवेचना कीजिए।

उत्तर ⇒ (i) मेरिस्टेम कल्चर द्वारा वायरस मुक्त पादपों का उत्पादन किया जाता है।

(ii) पारजीनी पौधों तथा जर्मप्लाज्म संग्रहण में उपयोग किया जाता

(iii) लैंगिक प्रजनन में असक्षम पौधों में कायिक संकरण द्वारा अंतः स्पीशीज या अंतरास्पीशीज किस्मों का उत्पादन करने में।

(iv) परागकोष कल्चर द्वारा अगुणित पौधों का उत्पादन करने में।

(v) पारजीनी पौधे जिनकी उम्र लंबी तथा अच्छे स्वाद वाले होते हैं. में टमाटर की फ्लेवर किस्म उत्पादित की गई है।

(vi) भारत में कपास की कुछ किस्में cry जो जीन की अभिव्यक्ति के कारण कीटरोधी है. खेती के लिए संस्तुत की गई है।


20. खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि में पादप प्रजनन के योगदान की विवेचना कीजिए।

उत्तर ⇒ पादप प्रजनन का खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है

(i) प्रजनन द्वारा रोगरोधी किस्मों का विकास संभव हुआ।

(ii) लाइसिन की अधिकता वाली मक्के की किस्में विकसित की गई जैसे शक्ति, रतन तथा प्रोटीन

(iii) टिटिकम टरजीडम तथा सिकेल सिरेल का संकरण कराकर मानव निर्मित पराग बहुगुणित ट्रिटिकेल विकसित किया गया।

(iv) उत्परिवर्तन द्वारा फसलो की 200 से भी अधिक किस्में विकसित की गई है।

(v) चाय की स्वरिगुणत किस्म का उत्पादन हो रहा है। (vi) पुनः स्थापन द्वारा कई फसले यथा आलू, टमाटर, फूलगोभी, अंगूर, अमरूद आदि प्राप्त हुई हैं।

(vii) PUSA RH-10 एक धान की संकरण किस्म है जिसके दाने लंबे तथा सुगंधित होते है।


21. गाजर घास (Parthenium) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर ⇒ गाजर घास एक प्रकार का खर-पतवार है जो गेहूं के बीज के साथ विदेश से भारत आया था। इस पौधा का परागकण कुछ लोगों में श्वसन विकार यथादमा, श्वसनी शोध इत्यादि पैदा करता है। यह एक प्रकार का एलर्जी उत्पन्न करने वाला पौधा है।


 22. कुक्कुट पालन (मुर्गी पालन से आप क्या समझते हैं? अथवा, कुक्कुट फॉर्म प्रबंधन का संक्षिप्त विवरण दें।

उत्तर ⇒ मुर्गाफॉर्म में घरेलू मुर्गियों व तत्त्वों, तीतर आदि के देखभाल, उसका जनन क्रिया, लालन-पालन, उसके उत्पादों जैसे—मांस व अंडो के सफल प्रबंधन ही मुर्गीफॉर्म प्रबंधन कहलाता है। इसकी सफलता के लिए फॉर्म के क्षेत्रफल के हिसाब से मुर्गियों की संख्या रखना, मुर्गियों को रोगों से बचाव के लिए टीके का प्रयोग, साँपो, बिल्लियों एवं कुत्तों से बचाने की व्यवस्था करना, ठंड-गर्मी से बचाव की व्यवस्था करना तथा पौष्टिक आहार की उपलब्धता आवश्यक है।


23. अंत: प्रजनन (Inbreeding) क्या है ?

उत्तर ⇒ अंतः प्रजनन का अर्थ एक ही नस्ल के अधिक निकटस्थ व्यक्ति के मध्य 4-6 पीढ़ी तक संगम होना है। प्रजनन की कार्यनीति निम्न प्रकार से होती है। एक नस्ल से उत्तम किस्म का नर तथा उत्तम किस्म की मादा को पहले अभिनिर्धारित किया जाता है तथा जोड़ों में संगम कराया जाता है। ऐसे संगम से जो संतति उत्पन्न होती है, उस संतति का मूल्यांकन किया जाता है तथा भविष्य में कराए जाने वाले संगम के लिए अत्यंत ही उत्तम किस्म के नर तथा मादा की पहचान की जाती है। पशुओं में श्रेष्ठ मादा, चाहे वह गाय अथवा भैंस हो, प्रति दुग्धीकरण पर अधिक दूध देती है।


24.पीड़क प्रतिरोधी पौधे पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर ⇒ आनुवंशिक अभियांत्रिकी की विधियों एवं ज्ञान में विकास होने से बैसोलस प्यूरिजिऐसिस के टॉक्सिन के लिए जिम्मेवार जीन की खोज वैज्ञानिकों ने पिछले दशक में की है एवं इसे सफलतापूर्वक पौधों में आरोपित किया है। ऐसा करने के फलस्वरूप पौधे पीड़क प्रतिरोधी हो जाते है एवं पीड़कों का प्रकोप इन पौधों पर नहीं पड़ता है।


25. धान तथा गेहूँ की दो-दो प्रोन्नत किस्मों के नाम बतायें।

उत्तर ⇒ धान की प्रोन्नत किस्में- साबरमती, जया, बाला, कृष्णा गेहूँ की प्रोन्नत किस्में-कल्याण सोना, शरबती सोनोरा, लेरमा रोजो, सोनोरा।

12th Biology VVI Subjective Question 2024


Class 12th Biology – Objective 
1जीवधारियों में जननClick Here
2पुष्पी पादपों में लैंगिक प्रजननClick Here
3मानव प्रजननClick Here
4जनन स्वास्थ्यClick Here
5वंशागति और विभिन्नता के सिद्धांतClick Here
6वंशागति का आणविक आधारClick Here
7विकासClick Here
8मानव स्वास्थ्य एवं रोगClick Here
9खाद उत्पादन बढ़ाने के लिए उपायClick Here
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