Class 12th Exam Biology Subjective Question :- दोस्तों यदि आप Class 12th Exam 2024 Biology Subjective Question की तैयारी कर रहे हैं तो यहां पर आपको 12th Biology Subjective Question 2024 दिया गया है जो Inter Exam Biology Subjective Question के लिए महत्वपूर्ण है, Biology Subjective Question 12th Class 2024
Class 12th Exam Biology Subjective Question 2024
1. जनन स्वास्थ्य के उन पहलुओं को सुझाएँ, जिन पर आज के परिदृश्य में विशेष ध्यान देने की जरूरत है ?
उत्तर— आज हमें अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओं तथा सामाजिक उत्पीड़नों जैसे कि यौन दुरुपयोग एवं यौन सम्बन्धी अपराधों आदि के बारे में जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है ताकि लोग इन्हें रोकने एवं जननात्मक रूप से जिम्मेदार एवं सामाजिक रूप से स्वस्थ समाज तैयार करने पर विचार करें और आवश्यक कदम उठाएँ। लोगों को जनन संबंधी समस्याओं, बंध्यता (बांझपन) आदि के बारे में चिकित्सा सहायता एवं देखभाल उपलब्ध कराना आवश्यक है। समय—समय पर बेहतर तकनीकों और नई कार्य नीतियों को क्रियान्वित करने की भी आवश्यकता है ताकि लोगों की अधिचारू रूप से देखभाल और सहायता की जा सके। बढ़ती मादा भ्रूण हत्या पर कानूनी रोक तथा लिंग परीक्षण आदि पर वैधानिक प्रतिबंध लगाना जरूरी है । बाल प्रतिरक्षीकरण (टीका) आदि कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है ।
2. जनन ग्रंथि को हटाना, गर्भ निरोधकों का विकल्प नहीं माना जा सकता है, क्यों ?
उत्तर— जनन ग्रंथियाँ बच्चा पैदा करने वाले अंग है । वे नर में शुक्राणुओं का उत्पादन करती हैं और मादा में अण्डे का उत्पादन करती हैं । गर्भ निरोध के लिए स्वस्थ अंगों का शरीर से हटाना कोई अच्छा विचार नहीं है । इससे मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। जबकि दूसरी गर्भ निरोधक विधियाँ आसानी से उपलब्ध हैं, उनका कोई बुरा प्रभाव नहीं है, न ही वे महँगी हैं और उन्हें आसानी से प्रयोग किया जा सकता है तथा जरूरत पड़ने पर हटाया भी जा सकता है। जनन ग्रंथि को हटाना एक जटिल प्रक्रिया है, कानून भी हमें उसकी आज्ञा नहीं देता। इसलिए इसे हटाना गर्भ निरोधकों का विकल्प नहीं माना जा सकता।
3. उल्बवेधन एक घातक लिंग निर्धारण (जाँच) प्रक्रिया है, जो हमारे देश में निषेचित है ? क्या यह आवश्यक होना चाहिए ? टिप्पणी करें ।
उत्तर— बढ़ती मादा भ्रूण हत्या की कानूनी रोक के लिए उल्बवेधन (ऐमीनोसैटैसिस) जाँच (भ्रूणीय लिंग निर्धारण) लिंग परीक्षण पर वैधानिक प्रतिबंध उचित है क्योंकि यह खतरनाक प्रवृत्ति है। इससे शिशु के लिंग निर्धारण के लिए उल्बवेधन का दुरुपयोग होता है। बहुत बार ऐसा देखा गया है कि यह पता चलने पर कि भ्रूण मादा है, एम टी पी कराया जाता है, जो पूरी तरह गैर—कानूनी है। इस प्रकार के व्यवहार से बचना चाहिए क्योंकि यह युवा माँ और भ्रूण दोनों के लिए खतरनाक है । इससे समाज में पुरुष तथा महिलाओं की संख्या का अनुपात भी बिगड़ सकता है। जिसके कारण वैवाहिक समस्याएँ तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती है । इस कारण, इस विधि पर हमारे देश में प्रतिबंध है जोकि उचित है ।
4. किसी व्यक्ति को यौन संचारित रोगों के संपर्क में आने से बचने के लिए कौन से उपाय अपनाने चाहिए ?
उत्तर— कोई भी रोग या संक्रमण जो मैथुन द्वारा संचारित होते हैं उन्हें सामूहिक तौर पर यौन संचारित रोग (एस. टी. डी.) या रतिजरोग (वी. डी.) अथवा जनन मार्ग (आर. टी. आई.) संक्रमण कहा जाता है। सुजाक (गोनोरिया), सिफलिस, हर्पीस, जननिक परिसर्प (जेनाइटिल हर्पीज), क्लेमिडियता, ट्राइकोमोनसता, लैंगिक मस्से, यकृतशोथ—बी और हाल ही में सर्वाधिक चर्चित एवं घातक एच आई वी / एड्स आदि सामान्य यौन संचारित रोग हैं इनसे बचने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए:
(क) किसी अनजान व्यक्ति या बहुत से व्यक्तियों के साथ यौन संबंध न रखें।
(ख) मैथुन के समय सदैव कंडोम का इस्तेमाल करें।
(ग) यदि कोई आशंका है तो तुरंत ही प्रारंभिक जाँच के लिए किसी योग्य डॉक्टर से मिलें और रोग का पता चले तो पूरा इलाज कराएँ ।
5. MTP (Medical Termination of Pregnancy) विधि क्या है ?
उत्तर— MTP विधियों को सुधारक विधियाँ भी कहते हैं। इन्हें तब इस्तेमाल किया जाता है जब गर्भ ठहर गया हो। गर्भपात तथा चूषण ( aspiration) ऐसी दो सुधारक विधियाँ हैं जिनके द्वारा गर्भ को यांत्रिक विधि द्वारा अथवा हॉर्मोनों के उपयोग से समाप्त किया जा सकता है।
Class 12th Biology Chapter Wise Subjective 2024
6. जनसंख्या विस्फोट से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर— मनुष्यों द्वारा विविध कारणों से अधिक संतानें पैदा की जा रही है जिसके कारण जनसंख्या में बहुत वृद्धि हो गई है जिससे ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जिसे हम जनसंख्या विस्फोट (population explosion) कहते हैं। जनसंख्या वृद्धि से अनेक समस्याएँ खड़ी हो गई हैं, जैसे—भोजन, आश्रय तथा कपड़े की समस्याएँ आदि ।
7. गर्भ निरोधक किन्हें कहते हैं? स्त्रियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले किन्हीं दो गर्भ निरोधकों के नाम लिखिए।
उत्तर— प्राकृतिक तथा यांत्रिक विधियों द्वारा निषेचन को रोकना गर्भ निरोधक कहलाता है तथा गर्भ निरोधक विधियों द्वारा अण्डे और शुक्राणु के संलयन को रोका जाता है।
स्त्रियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले दो गर्भ निरोधकों के नाम इस प्रकार है —
(i) गर्भ निरोधक गोलियाँ (Contraceptive pills) — गर्भ निरोधक गोलियों को रोज खाना पड़ता है, जिनसे मादा में अण्डोत्सर्ग नहीं होता। इन गोलियों से केवल अण्डोत्सर्ग नहीं हो सकता है और रजोचक्र का रक्तस्राव एवं गर्भाशय की दीवार के अस्तर का उतरना सामान्य रूप से होता रहता है। है
(ii) डायाफ्राम (Diaphragm ) – इसे डॉक्टर द्वारा गर्भाशय के मुख (सर्विक्स) पर फिट कर दिया जाता है जिससे शुक्राणु सर्विक्स नलिका में प्रवेश नहीं कर सकते।
8. लोगों को यौन संचारित रोगों, यौन क्रियाओं तथा जनन संबंधी स्वस्थ जीवन बिताने के प्रति जागरुक करना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर— लोगों को जनन अंगों, किशोरावस्था एवं उससे संबंधित परिवर्तनों, सुरक्षित और स्वच्छ यौन – क्रियाओं, यौन संचारित रोगों एवं एड्स के बारे में जानकारी विशेषरूप से किशोर आयुवर्ग को तथा जनन सक्षम जोड़ी तथा वे लोग जिनकी आयु विवाह योग्य है, उन्हें उपलब्ध कराई जाती है। जन्म नियंत्रक (गर्भ निरोधक) विकल्पों तथा गर्भवती माताओं की देखभाल, माँ और बच्चे की प्रसवोत्तर ( पोस्टनेटल) देखभाल आदि के बारे में तथा स्तनपान के महत्व, लड़का या लड़की को समान महत्व एवं समान अवसर देने की जानकारियों आदि से जागरुक स्वस्थ परिवारों का निर्माण होगा। अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि से होने वाली समस्याओं तथा सामाजिक उत्पीड़नों जैसे कि यौन दुरुपयोग एवं यौन संबंधी अपराधों आदि के बारे में जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है, ताकि लोग इन्हें रोकने एवं जननात्मक रूप से जिम्मेदार एवं सामाजिक रूप से स्वस्थ समाज तैयार करने के बारे में विचार करें और आवश्यक कदम उठाएँ।
9. क्या विद्यालयों में यौन शिक्षा आवश्यक है ? यदि हाँ तो क्यों ?
उत्तर — विद्यालयों में यौन शिक्षा की पढ़ाई को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को सही जानकारी मिल सके। बच्चे यौन संबंधी विभिन्न पहलुओं के बारे में फैली भ्रांतियों पर विश्वास न करें जिससे बच्चे को यौन संबंधी गलत धारणाओं से छुटकारा मिल सके। लोगों को जनन अंगों, किशोरावस्था एवं उससे संबंधित परिवर्तनों सुरक्षित और स्वच्छ यौन क्रियाओं, यौन संचारित रोगों एवं एड्स के बारे में जानकारी, विशेष रूप से किशोर आयुवर्ग में जनन संबंधी स्वस्थ जीवन बिताने में सहायक होती है। अतः यौन शिक्षा विद्यालयों में दी जानी जरूरी है।
10. जनसंख्या विस्फोट के कौन-से कारण हैं ?
उत्तर— जनसंख्या विस्फोट के प्रमुख कारण इस प्रकार है
(i) मृत्युदर में तीव्र गिरावट तथा मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर (इनफेंट मोर्टलिटी रेट) में कमी।
(ii) जनन से लोगों की संख्या में वृद्धि का होना ।
(iii) महिलाओं का अशिक्षित होना।
(iv) अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण जीवन स्तर में सुधार।
(v) परिवार नियोजन तरीकों को पूरी तरह से न अपनाया जाना ।
Inter Exam Biology Subjective Question 2024
11. पात्रे निषेचन (In vitro Fertilization) से आपका क्या अभिप्राय है ? यह किस प्रकार बंध्य दंपत्तियों को संतान उत्पन्न करने में मदद कर सकता है ?
उत्तर—पात्रे निषेचन विशेष रूप में सहायक जनक प्रौद्योगिकी है। यदि निषेचन की प्रक्रिया शरीर से बाहर हो, परन्तु निषेचन की सम्पूर्ण परिस्थितियाँ आदि बिल्कुल शरीर के अन्दर की तरह हो, तो इसे पात्रे निषेचन कहते हैं। इसके अन्तर्गत कई सफल तकनीकियाँ है जिनसे बंध्य दम्पत्तियों में सन्तान उत्पन्न कराया जा सकता है। कुछ महत्त्वपूर्ण तकनीकियाँ हैं—
(क) भ्रूण रूपान्तरण तथा टेस्ट ट्यूब बेबी कार्यक्रम — इसमें प्रयोगशाला में अनुरूपी परिस्थितियों में पत्नी अथवा दाता स्वी के अण्डे एवं पति अथवा दाता पुरुष के शुक्राणुओं को एकत्रित कर युग्मनज बनाने को प्रेरित किया जाता है। 8 ब्लास्टोमीयर की अवस्था वाले युग्मनज को मादा के डिबुवाहिनी में स्थानान्तरित किया जाता है जिसे जाइगोट इन्ट्राफैलोपियन ट्रांसफर कहते हैं, परन्तु युग्मनक की अवस्था 8 ब्लास्टोमीयर से अधिक होने पर परिवर्धन हेतु सीधे गर्भाशय में स्थानान्तरित किया जाता है जिसे इन्ट्रा यूटेराइन ट्रांसफर कहते हैं ।
(ख) अन्तः कोशिकीय शुक्राणु निक्षेपण — यदि मादा गर्भाधारण एवं भ्रूण परिवर्धन के उपयुक्त हो, परन्तु अण्डाणु उत्पन्न नहीं कर सकती हो, तब उसके डिम्ब वाहिनी में दाता स्वी के अण्डाणु को इन्ट्रा फैलोपियन ट्रांसफर द्वारा स्थापित कर लिया जाता है। तत्पश्चात् शुक्राणु को सीधे अण्डाणु में अन्तः क्षेपित किया जाता है जिसे अन्तः कोशिकीय शुक्राणु निक्षेपण कहते हैं।
(ग) कृत्रिम वीर्यसेचन / गर्भाशय वीर्यसेचन— इस तकनीक में स्वस्थ दाता से शुक्राणु लेकर कृत्रिम रूप से स्वी के योनि अथवा गर्भाशय में प्रविष्ट कराया जाता है जिसे कृत्रिम वीर्यसेचन अथवा गर्भाशय वीर्यसेचन भी कहते हैं। इस प्रकार पात्रे निषेचन द्वारा बंध्य दम्पत्तियों में संतान उत्पन्न करने के कई विकल्प है।
12. निम्नांकित का विस्तारित रूप लिखें —
(i) IUD, (ii) MTP, (iii) IVF, (iv) ICSI, (v) IUI.
उत्तर —
(i) IUD — Intra Uterine Device (अन्तः गर्भाशयी यंत्र )
(ii) MTP — Medical Termination of Pregnancy (चिकित्सीय सगर्भता समापन)
(iii) IVF In vitro Fertilization (अन्त: पात्री निषेचन)
(iv) ICSI—Intra cytoplasmic sperm Injection (अन्तः कोशिका द्रव्यीय शुक्राणु अन्तः क्षेपण)
(v) IUI – Intra Uterine Insemination (अन्तः गर्भाशयी शुक्राणु सेवन)
13. सगर्भता का चिकित्सीय समापन से आपका क्या अभिप्राय है ?
उत्तर— यह गर्भकाल के पूर्ण होने के पूर्व कुशल चिकित्सक द्वारा शल्यक्रिया और औषधियों के प्रयोग द्वारा गर्भ समापन करता है। यह अवांछित गर्भ धारण समाप्त करता है।
14. बंध्यता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर — किसी व्यक्ति की वह अवस्था जो इसे प्राकृतिक रूप से जनन करने से रोकता हो, बंध्यता कहलाता है।
15. किसी चार यौन संचारित रोग के नाम, उनके कारक रोगाणुओं के साथ लिखें।
उत्तर— यौन संचारित रोग एवं कारक :
(i) एड्स — ह्यूमन इम्यूनो डेफिसिएंसी वायरस
(ii) हर्पिस — सिंप्लेक्स वायरस II
(iii) सिफलिस — ट्रेपोनेमा पैलिडम बैक्टीरिया
(iv) गोनोरिया — निसेरिया गोनोरी बैक्टीरिया ।
12th Biology VVI Subjective Question
16. रक्त के कार्य बतायें।
उत्तर — रक्त एक तरल संयोजी उत्तक है जिसका pH मान 7.4 क्षारीय होता है। एक व्यस्क मानव में औसतन 5 से 6 लीटर रक्त होता है। रक्त के कार्य :
(i) यह शरीर का तापमान बनाए रखता है ।
(ii) रक्त में फ्राइब्रिनोजन पाया जाता है जो शरीर के किसी बाहरी भाग के कट जाने पर रक्त थक्का बनाने में मदद करता हैं, जिससे रक्त का बहना रूक जाता है।
(iii) रक्त में पाया जाने वाला RBC रक्त में 02 तथा CO2 का स्थानान्तरण करने का कार्य करता है।
(iv) रक्त में पाया जाना वाला WBC शरीर को रोगों के संक्रमण से बचाता है।
17. वन्ध्याकरण क्या है ? इसके तरीकों का उल्लेख करें।
उत्तर — भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत से दंपत्ति बंध्य है अर्थात् उन्मुक्त या असुरक्षित सहवास के बावजूद भी वे बच्चे पैदा कर पाने में असमर्थ होते हैं। इसके अनेक कारण हो सकते हैं, जो कि शारीरिक, जन्मजात रोग जन्य, , औषधिक, प्रतिरक्षात्मक और यहाँ तक कि मनोवैज्ञानिक भी हो सकते हैं। भारतवर्ष में प्रायः दंपत्तियों में बच्चा न होने का दोष खियों को ही दिया जाता है जबकि प्रायः ऐसा नहीं होता है, यह समस्या पुरुष साथी में भी होती है। विशिष्ट स्वास्थ्य सेवा इकाइयाँ वैज्ञानिक जाँच में सहायक हो सकती हैं और इनमें से कुछ विकारों का उपचार करके दंपत्तियों को बच्चे पैदा करने में मदद दे सकती है। फिर भी, जहाँ ऐसे दोषों को ठीक करना संभव नहीं है वहाँ कुछ विशेष तकनीकों द्वारा उनको बच्चा पैदा करने में मदद की जा सकती है। ये तकनीक सहायक जनन प्रौद्योगिकीयाँ (ART) कहलाती है। आजकल टेस्ट ट्यूब बेबी’ काफी सफल तकनीक है। इनमें अंडों का निषेचन शरीर के बाहर परखनली में होता है। फिर 8 से 16 कोशिका अवस्था में युग्मनज का स्थानापन्न माता के गर्भाशय में होता है जहाँ गर्भ में शिशु का विकास होता रहता है।
18. जीवाणु जनित किन्हीं चार प्रतिजैविक के नाम लिखें।
उत्तर — जीवाणु जनित चार प्रतिजैविक का नाम इस प्रकार से हैं— (i) सिफैलोस्पोरिन, (ii) पोलीपोरिक में पॉलीमीक्सिन (iii) थायरोक्सिसिन, (iv) सबटिलिन जीवाणु । ये चारों जीवाणु जन्म प्रतिजैविकों में शामिल है। स्ट्रेप्टोकाइनेज एंजाइम के उत्पादन में स्ट्रेप्टोकोकस जीवाणु शामिल हैं। साइक्लेस्पोरिन – A का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम नामक कवक से होता है, स्टैटिन का उत्पादन मोनोस्कस परफयूरीअस नाम यीष्ट या कवक से होता है।
19. संतति नियंत्रण के विभिन्न उपायों का वर्णन करें ।
उत्तर— संतति नियंत्रण के विभिन्न उपाय इस प्रकार से है :—
(i) प्राकृतिक विधि – इसके अन्तर्गत मानसिक संयम तथा मासिक चक्र की एक निश्चित अवधि में संभोग वर्जित रखा जाता है।
(ii) यांत्रिक विधि — यांत्रिक संसाधन द्वारा अप्रत्याशित गर्भ धारण को रोका जा सकता है। इसके लिए सशक्त संसाधन उपलब्ध है। पुरुषों के लिए लैटेक्स का बना कन्डोम तथा स्त्रियों के लिए विभिन्न प्रकार का डायफ्राम एवं सवाईकल कैप मौजूद है।
(iii) रासायनिक विधियाँ — शुक्राणुनाशक क्रीम, जेली पेस्ट तथा टैबलेट को सम्भोग के पूर्व मादा की योनि में लगा दिया जाता है जिससे शुक्राणु स्खलित होते ही नष्ट हो जाते हैं।
(iv) सर्जिकल विधि – इसके द्वारा परिवार नियोजन का स्थायी प्रबन्ध किया जाता है। नर में शल्य क्रिया द्वारा शुक्रवाहिका को काट कर धागे से बाँध दिया जाता है। जिसे पुरुष नसबन्दी कहा जाता है। शल्य क्रिया द्वारा खी का भी नसबन्दी किया जाता है। इसमें स्त्रियों । के अण्डाशय को ही हटा दिया जाता है।
Class 12th Exam Biology Subjective 2024
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