10th Ka History Subjective Questions in Hindi PDF | 10th बोर्ड इतिहास व्यापार और भूमंडलीकरण

10th Ka History Subjective Questions :- दोस्तों यदि आप 10th Social Science Subjective Questions In Hindi की तैयारी कर रहे हैं तो यहां पर आपको 10th History ( व्यापार और भूमंडलीकरण ) Subjective Question दिया गया है जो आपके 10th Pariksha Bihar board social science question के लिए काफी महत्वपूर्ण है | BSEB 10th & 12th App

10th & 12th Question PDF

1. विश्व बाजार किसे कहते हैं?

उत्तर – उस तरह के बाजारों को हम बीच बाजार कहेंगे जहां विश्व के सभी देशों की वस्तुएं आम लोगों को खरीदने के लिए उपलब्ध हो।

जैसे – भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई।


2. भूमंडलीकरण के भारत पर प्रभाव को स्पष्ट करें।

उत्तर    भूमंडलीकरण ने विश्व अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत को भी प्रभावित किया है। आज भूमंडलीकरण के कारण जीविकोपार्जन के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। भारत में रहने वाले लोगों के लिए भूमंडलीकरण के दौर में रोजगार के कई नवीन अवसर उपलब्ध हुए हैं, जैसे टूर एवं ट्रेवल्स एजेंसी, रेस्टोरेंट्स, रेस्ट हाउस, आवासीय होटल इत्यादि। सूचना एवं संचार के क्षेत्र में भी क्रांति आ गई है। इस क्षेत्र में भी भारतीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। आर्थिक भूमंडलीकरण ने हमारी आवश्यकता ओं के दायरे को बढ़ाया है और उसी अनुरूप उसकी पूर्ति हेतु नई नई सेवाओं का उदय हो रहा है लाखों लोग अपनी जीविका चला रहे हैं। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया ने भारतीय लोगों के जीवन स्तर को भी बढ़ाया है।

10th Ka History Subjective Questions


3. औद्योगिक क्रांति ने किस प्रकार विश्व बाजार के स्वरूप को विस्तृत किया?

उत्तर   विश्व बाजार के स्वरूप का विस्तार औद्योगिक क्रांति के बाद ही हुआ। इस क्रांति ने बाजार को तमाम आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया। जैसे-जैसे औद्योगिक क्रांति का विकास हुआ,बाजार का स्वरूप विश्वव्यापी होता चला गया और बीसवीं शताब्दी के पहले तक जो इतने सभी देशों में अपनी उपस्थिति कायम कर ली। उत्पादन के बढ़ते आकार से कच्चे माल की आवश्यकता हुई जिस ने इंग्लैंड को उत्तरी अमेरिका, एशिया और अफ्रीका की ओर ध्यान आकर्षित किया जहां से उसे कच्चा माल के साथ बना बनाया एक बाजार भी मिला।


4. विश्व बाजार के लाभ हानि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर   विश्व बाजार के लाभ- विश्व बाजार में व्यापार और उद्योग को तीव्र गति से बढ़ाया। व्यापार और उद्योगों के विकास में पूंजीपति, मजदूर और मध्यम वर्ग नामक तीन शक्तिशाली सामाजिक वर्ग को जन्म दिया। आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था का उदय और विकास इसी के बाद हुआ। भारत जैसे औपनिवेशिक देशों को सीमित मात्रा में ही सही औद्योगिकीकरण और आधुनिकीकरण विश्व बाजार के आलोक में ही हुआ। विश्व बाजार ने नवीन तकनीकों को सृजित किया जिनमें रेलवे इंजन, भाप का जहाज, टेलीग्राफ, बड़े जलप्रपात महत्वपूर्ण है। इन तकनीकों ने विश्व बाजार और उसके लाभ को कई गुना बढ़ा दिए। शहरीकरण का विस्तार और जनसंख्या में महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार का एक बड़ा लाभकारी परिणाम था।
विश्व बाजार की हानि – विश्व बाजार ने एशिया और अफ्रीका में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद के साथ-साथ एक नए युग को जन्म दिया, टेलीग्राफ, बड़े जलप्रपात महत्वपूर्ण रहे । इन तकनीकों ने विश्व बाजार और उनके लाभ कई गुना बढ़ा दिए। शहरीकरण का विस्तार और जनसंख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि वैश्विक व्यापार का एक बड़ा लाभकारी परिणाम था।
विश्व बाजार की हानि- विश्व बाजार ने एशिया और अफ्रीका में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद के साथ-साथ एक नए युग को जन्म दिया, साथ ही साथ भारत जैसे पुराने निवेशकों का शोषण और तीव्र हुआ। अपनी बसों की अपनी स्थानीय आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था जिसकी आधार कृषि और लघु तथा कुटीर उद्योग था, नष्ट हो गई।व्यापार में वृद्धि और विश्व अर्थव्यवस्था के साथ निकटता ने औपनिवेशिक लोगों की अजीब का को छीन लिया। औपनिवेशिक देशों में विश्व बाजार में अकाल, भुखमरी, गरीबी जैसे मानवीय संकटों को जन्म दिया।


5. 1929 के आर्थिक संकटों के कारणों को संक्षेप में स्पष्ट करें।

उत्तर   1929 के आर्थिक संकट का बुनियादी कारण स्वयं स्थापित हुआ था के स्वरूप में ही समाहित था। प्रथम विश्व युद्ध के 4 वर्षों में यूरोप को छोड़कर बाजार आधारित अर्थव्यवस्था पर विस्तार होता गया, उसके मुनाफे बढ़ते गए। दूसरी तरफ अधिकांश लोग गरीबी और अभाव में पीसते रहे।नवीन तकनीकी प्रगति तथा बढ़ते हुए मुनाफे के कारण उत्पादन में भारी वृद्धि हुई लेकिन उसे खरीद सकने वाले लोग काफी कम थे।
कृषि क्षेत्र में भी अति उत्पादन से कृषि उत्पादों की कीमतें गिरी क्योंकि उसे खरीदने वाले लोग बहुत कम थे। आधुनिक अर्थशास्त्री कार्डलिफ ने लिखा है किविश्व के सभी भागों में कृषि उत्पादन एवं खाद्यान्नों के मूल की विकृति 1929-32 के आर्थिक संकटों का प्रमुख कारण थी। 1920 के दशक के मध्य में बहुत सारे देशों ने अमेरिका से कर्ज लेकर अपनी युद्ध से तबाह हो चुकी अर्थव्यवस्था को नए सिरे से विकसित करने का प्रयास किया। अमेरिकी पूंजीपतियों ने यूरोप को कर्ज दिए। लेकिन,अमेरिका के घरेलू स्थिति में संकट के संकेत मिलते ही वे उन देशों से कर्ज वापस मांगने लगे जिससे यूरोपीय देशों के बीच गंभीर आर्थिक संकट छा गया।


6. विश्व बाजार के स्वरूप को समझाएं।

उत्तर   18 वीं सदी के मध्य भाग से इंग्लैंड में बड़े बड़े कारखानों में वस्तुओं का उत्पादन आरंभ हुआ। यह कारखाने भाप इंजन से चलते थे। इस प्रक्रिया से वस्तुओं का उत्पादन काफी बढ़ा।उत्पादन के बढ़ते आकार के हिसाब से कच्चे माल की आवश्यकता हुई जिसके कारण इंग्लैंड का ध्यान उत्तर अमेरिका,एशिया और अफ्रीका की ओर गया जहां उसे पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल तथा बना बनाया एक बाजार भी मिला। इन्हीं दो चीजों पर औद्योगिक क्रांति सफल होता, इसलिए इंग्लैंड में इन प्रचुर संसाधनों पर अस्थाई अधिकार का प्रयास आरंभ किया। इससे उपनिवेशवाद नामक एक नवीन शासन प्रणाली विकसित हुई। 18वीं और प्रारंभिक 19वीं शताब्दी का विश्व बाजार स्वरूप का आधार था- कपड़ा उद्योग।


7. भूमंडलीकरण में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के योगदान को स्पष्ट करें।

उत्तर    भूमंडलीकरण राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक,वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक जीवन के विश्वव्यापी समायोजन की एक प्रक्रिया है जो विश्व के विभिन्न देशों के लोगों को भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर एकीकृत करने का सफल प्रयास करती है। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया 19वीं सदी के मध्य से लेकर प्रथम युद्ध के आरंभ तक काफी तीव्र रही। इस दौरान वस्तु,पूंजी और श्रम तीनों का अंतरराष्ट्रीय प्रवाह लगातार बढ़ता गया। इसमें इस दौरान विकसित नवीन तकनीकों का भी उसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा। भूमंडलीकरण धीरे-धीरे संपूर्ण विश्व के अर्थतंत्र का नियामक हो गया। इसके प्रभाव को कायम करने में विश्व बैंक,अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व व्यापार संगठन के साथ-साथ पूंजीवादी देशों की बड़ी-बड़ी व्यापारिक और औद्योगिक कंपनियों का बहुत बड़ा योगदान है।


8. आर्थिक संकट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर   अर्थव्यवस्था में आने वाली वैसी स्थिति जब उसके तीनों आधारित कृषि, उद्योग और व्यापार का विकास अवरुद्ध हो जाए,लाखों लोग बेरोजगार हो जाए और कंपनी का दिवाला निकल जाए तथा वस्तु और मुद्रा दोनों की बाजार में कोई कीमत ना रहे। पूरा स्टाफ इसे हम आर्थिक संकट कहेंगे।

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9. भूमंडलीकरण किसे कहते हैं?

उत्तर   भूमंडलीकरण राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक जीवन के विश्वव्यापी समायोजन की प्रक्रिया है जो विश्व के विभिन्न भागों के लोगों को भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर एकीकृत करने का सफल प्रयास करती है।


10. बहुराष्ट्रीय कंपनी क्या है ?

उत्तर    कई देशों में एक ही साथ व्यापार और व्यवसाय करने वाली कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनी कहा जाता है। यह बहुराष्ट्रीय कंपनियां पूंजीवादी देशों की बड़ी-बड़ी व्यापारिक और औद्योगिक कंपनियां हैं।


11. महान आर्थिक मंदी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर    महान आर्थिक मंदी 1929 ईस्वी में हुआ। इसका प्रमुख कारण था-अति उत्पादन। प्रथम विश्व युद्ध के समय कृषि तथा औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि की गई। युद्ध उपरांत खरीददारों की संख्या कम हो गई। इससे कृषकों एवं उद्योगपतियों दोनों की स्थिति खराब हो गई।


12. ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर    ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन जुलाई 1944 ईस्वी में अमेरिका के न्यू हेंपशायर नामक स्थान पर हुआ जिसका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक विश्व में आर्थिक स्थिरता एवं रोजगार था, क्योंकि इसी आधार पर विश्व शांति स्थापित की जा सकती थी।


13.1950 के बाद विश्व अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए किए जाने वाले प्रयासों का वर्णन करें।

उत्तर  1950 से 1960 के दशक में महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों का विकास हुआ था। विश्व में साम्यवादी विचार के प्रसार को रोकने के लिए समन्वय और सहयोग के एक नवीन युग की शुरुआत की गई जिसे यूरोप के एकीकरण के नाम से हम जानते हैं। इस दिशा में पहला प्रयास 1945 के पहले फ्रांस के विदेश मंत्री ब्रिया के यूरोपीय संघ के विचार में हम देखते हैं। लेकिन, वास्तविक रूप लक्जमबर्ग ने, बेनेलिक्स नामक संघ बनाया। इसी प्रकार 1948 में ब्रुसेल्स संधि जिस ने यूरोपीय आर्थिक सहयोग की प्रक्रिया कोयला एवं इस्पात के माध्यम से शुरू की। इन प्रयासों के बीच बड़ा कदम 1957 में उठाया गया। यूरोपीय समुदाय, यूरोपियन इकोनॉमिक कम्युनिस्ट की स्थापना की गई। इसमें फ्रांस, पश्चिम जर्मनी, बेल्जियम, हालैंड, लक्जमबर्ग और इटली शामिल हुए। इन देशों ने एक साझा बाजार स्थापित किया।


14. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर   साधन भाषा में वैश्वीकरण का अर्थ है अपनी अर्थव्यवस्था और विश्व अर्थव्यवस्था में सामंजस्य स्थापित करना । इसके अंतर्गत हम अपने देश से निर्मित माल और सेवाएं दूसरे देश में भेज सकते हैं। इस प्रकार,वैश्वीकरण के कारण विश्व के विभिन्न देशों में राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे पर परस्पर रूप में निर्भर रहते हैं।


15. विश्व बाजार की उपयोगिता या महत्व की चर्चा करें।

उत्तर   आर्थिक गतिविधियों को स्वतंत्र रूप से संचालित होने को सुनिश्चित करने के लिए बाजार के स्वरूप का विश्वव्यापी होना आवश्यक होता है। व्यापारियों, श्रमिकों, पूंजीपतियों,आम मध्यम वर्ग तथा आम उपभोक्ताओं के हितों को बाजार का विश्वव्यापी स्वरूप सुरक्षित रखता है। किसानों को अपनी उपज की अच्छी कीमत प्राप्त होती है ”क्योंकि बाजार ज्यादा प्रतिस्पर्धी होता है। कुशल श्रमिकों को विश्व स्तर पर पहचान तथा महत्व और आर्थिक लाभ इसी में से एक बजाना प्राप्त होता है। रोजगार के नए अवसर विश्व बाजार में श्रीजीत होते हैं। आधुनिक विचार और चेतना के प्रसार में भी इसका बड़ा महत्व होता है ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न


1. भूमंडलीकरण के कारण आम लोगों के जीवन में आने वाले परिवर्तन को स्पष्ट करें।

उत्तर    वर्तमान परिदृश्य में भूमंडलीकरण के प्रभाव को आर्थिक क्षेत्र में राधिका स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अर्थव्यवस्था की शक्ति को स्थापित करने में भूमंडलीकरण के आर्थिक स्वरूप का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मुक्त बाजार, मुक्त व्यापार,खुली प्रतिस्पर्धा बहुराष्ट्रीय निगमों का प्रसार उद्योग तथा सेवा क्षेत्र का निजीकरण व आर्थिक भूमंडलीकरण के मुख्य तत्व है। अभिजीत समय में हम रह रहे हैं उसमें भूमंडलीकरण का प्रभाव दिख रहा है। भूमंडलीकरण के कारण जीविकोपार्जन के क्षेत्र में बदलाव आया है उसकी झलक शहर, कस्बा और गांव सभी जगह पर साफ दिखाई पड़ रही है। वर्तमान दौर में 1991 के बाद संपूर्ण विश्व में सेवा क्षेत्र का विस्तार काफी तीव्र गति से हुआ है, जिससे जीविकोपार्जन के कई नए क्षेत्र खुले हैं। भूमंडलीकरण के कारण कई निजी कंपनी या बैंक में लोग लाभकारी योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित हुए हैं जिससे बीमा क्षेत्र का विस्तार हुआ है। रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।पर्यटन स्थल के विकास के कारण ही रोजगार के नवीन अवसर उपलब्ध हुए हैं जैसे, टूर एवं ट्रैवल एजेंसी, रेस्टोरेंट्स, रेस्ट हाउस, आवासीय होटल इत्यादि। निजी डाक सेवा,कंप्यूटर के कारण भी हजारों लोगों को रोजगार के नवीन अवसर उपलब्ध हुए हैं। इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि आर्थिक भूमंडलीकरण ने हमारी आवश्यकता ओं के दायरे को बढ़ावा है और उसी अनुरूप उसकी पूर्ति हेतु नई नई सेवाओं का उदय हो रहा है जिन से जुड़कर लाखों लोग अपनी जीविका चला रहे हैं। भूमंडलीकरण की प्रक्रिया ने लोगों के जीवन स्तर को भी बढ़ाया है। इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि भूमंडलीकरण ने आम लोगों के जीवन स्तर में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है।


2. आधुनिक युग के पूर्व भूमंडलीकरण के इतिहास का वर्णन करें।

उत्तर   आधुनिक युग में हम भूमंडलीकरण का विकसित रूप देख रहे हैं किंतु किसी ना किसी रूप में यह प्राचीन काल से भी मौजूद था। इसके स्वरूप भिन्न थे तथा इसकी व्यापकता भी कम थी।इतिहास हमें बताता है कि विश्व के विभिन्न भागों से शिक्षा प्राप्त करने तथा बौद्ध धर्म की जानकारी प्राप्त करने तथा विक्रमशिला विश्वविद्यालय आते थे। व्यापारिक क्षेत्र में चीन का रेशम मार्ग, सिंधु घाटी सभ्यता का व्यापारिक केंद्र दिल मून, मेलूहा,अलेक्जेंड्रिया आदि विश्व बाजार में के रूप में प्रसिद्ध था। इसी प्रकार राजनीतिक, समाजिक,वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संबंध में विश्व के एक दूसरे देशों के बीच था किंतु यातायात तथा संचार साधन सीमित होने के कारण आज जैसा विकसित तथा विस्तृत नहीं था।

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3. दो महायुद्ध के बीच और 1945 के बाद औपनिवेशिक देशों में होने वाले राष्ट्रीय आंदोलन पर एक निबंध लिखें।

उत्तर   औद्योगिक क्रांति के बाद से ही एशिया तथा अफ्रीका में औपनिवेशिक साम्राज्य की स्थापना होनी शुरू हो गई थी। उपनिवेशवाद ऐसी राजनीतिक आर्थिक प्रणाली जो प्रत्यक्ष रूप से एशिया और अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका में यूरोपीय देशों द्वारा स्थापित किया गया था जिसका एकमात्र उद्देश्य इन देशों का आर्थिक शोषण करना था। विश्व बाजार ने एशिया और अफ्रीका में साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद से एक नए युग को जन्म दिया, साथी साथ भारत जैसे उन निवेशकों का शोषण और तीव्र हुआ। व्यापार में वृद्धि और विश्व अर्थव्यवस्था के साथ निकटता ने अपने बेसिक लोगों की जीविका को छीन लिया।
इस काल में भारत और अन्य औपनिवेशिक देशों में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार निर्णायक रूप से हुआ क्योंकि प्रथम महायुद्ध के बाद उन्हें आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा। दूसरे, उस समय शासक देशों द्वारा किया गया स्वराज का वायदा पूरा नहीं हुआ। साम्राज्यवादी देशों ने आर्थिक नीतियों,खासकर उन की शोषणकारी आर्थिक नीतियों से औपनिवेशिक देशों में राष्ट्रीय भावना का संचार हुआ तथा वहां उस औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ राष्ट्रीय आंदोलन को बढ़ा बल मिला। इन्हीं राष्ट्रीय आंदोलन ने भारत सहित औपनिवेशिक देशों में स्वतंत्रता को दिलाया।


4. 1929 के आर्थिक संकट के कारण और परिणामों को स्पष्ट करें।

उत्तर   आर्थिक संकट के कारण- 1929 ईस्वी की आर्थिक मंदी का बुनियादी कारण स्वयं इस अर्थव्यवस्था के स्वरूप में ही समाहित था। प्रथम महायुद्ध के 4 वर्षों में यूरोप को छोड़कर बाजार आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार होता चला गया, उसके मुनाफे बढ़ते चले गए। दूसरी तरफ,अधिकांश लोग गरीबी और अभाव में पीते रहे। नवीन तकनीकी प्रगति तथा बढ़ते हुए चुनावों के कारण उत्पादन में जो भी भारी वृद्धि हुई उससे ऐसी उत्पन्न हो गई कि जो कुछ उत्पादित होता था उसे खरीद सकने वाले लोग बहुत कम थे ।
कृषि उत्पादन एवं खदानों के मूल्य में कमी- कृषि क्षेत्र में उत्पादन की वृद्धि तो हुई लेकिन उसे खरीद सकने वाले लोग बहुत कम थे। इससे कृषि उत्पादों में कीमतें गिरी जिससे किसानों की आज काफी घट गई। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री कार्ड लिखने अपनी पुस्तक द मोस्ट ऑफ़ नेशन में लिखा है कि विश्व के सभी भागों में कृषि उत्पादन एवं खदानों के मूल्य की विकृति उन्हें 1929 से 32 आर्थिक संकटों का प्रमुख कारण थी।
यूरोपीय देशों के बीच संकट- 1920 के दशक के मध्य में बहुत सारे देशों ने अमेरिका से कर्ज लेकर अपनी युद्ध से तबाही हो चुकी अर्थव्यवस्था को नए सिरे से विकसित करने का प्रयास किया। जब तक स्थिति अच्छी थी तब तक अमेरिकी पूंजीपतियों ने यूरोप कर दिए लेकिन अमेरिका की घरेलू स्थिति में संकट के कुछ संकेत मिलने के साथ ही वे लोग कर्ज वापस मांगने लगे। इससे यूरोपीय देशों के बीच गंभीर संकट खड़ा हुआ। इस परिस्थिति में यूरोप के कई बैंक डूब गए। पूर्ण देशों का मुद्रा गिर गया। इसमें और बड़ा संकट आ गया जब यूरोप ने अपने को यांत्रिक उत्पादन पर निर्भर कर लिया।
आर्थिक संकट के प्रभाव –
अमेरिका पर प्रभाव- इस आर्थिक मंदी का सबसे बुरा असर अमेरिका को भी झेलना पड़ा। मंदी के कारण बैंकों ने लोगों को कर्ज देना बंद कर दिए और दिए हुए कर्ज की वसूली तेजी कर दी। किसान अपनी उपज को नहीं बेच पाने के कारण बर्बाद हो गए बैंकों के कर्ज वापस नहीं चुका पाने से बैंकों ने लोगों के सामानों को कुर्क कर लिया। लोग सड़क पर आ गए। करो बार पढ़ने से बेरोजगारी बढ़ी, वसूली नहीं होने से बैंक बर्बाद हो गया।
अन्य देशों पर प्रभाव- जर्मनी और ब्रिटेन इस आर्थिक मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। अपने आप को इस मंदी से इसलिए बचा पाया क्योंकि उसे जर्मनी से काफी मात्रा में युद्ध हर्जाना की राशि प्राप्त हुई। जर्मनी में अराजकता फैल गई जिसका लाभ उठाकर हिटलर ने अपने आप को सत्तासीन किया। 1929 के बाद ब्रिटेन के उत्पादन, निर्यात, रोजगार, आया तो तथा जीवन निर्वाह अस्तर इन सब में तेजी से गिरावट आई।
भारत पर प्रभाव- महामंदी ने भारतीय व्यापार को काफी प्रभावित किया। 1928 से 1934 के बीच देश का आयात निर्यात घटकर लगभग आधा रह गया। कृषि उत्पादों की कीमत यहां काफी गिर गई। गेहूं की कीमत में प्रतिशत गिरावट आई। कृषि दाम में कमी के बावजूद अंग्रेजी सरकार लगान के दर्द कम करने को तैयार नहीं थी,जिससे किसानों में असंतोष की भावना बढ़ी । आर्थिक संकट ने भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रारंभ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Class 10th Ka History Subjective Question


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